Udramrit Vati

उदरामृत वटी के फायदे, नुकसान, खुराक, सावधानी | Udramrit Vati

उदरामृत वटी क्या है?

उदरामृत वटी की उपयोगिता उन लोगों के लिए ज्यादा है, जो सदैव अपनी बीमारियों का प्राकृतिक इलाज तलाशते है। वटी का अर्थ होता है “टैबलेट”। यानी उदरामृत वटी गोलियों के रूप में आती है।

इस आयुर्वेदिक दवा के कई विकल्प हो सकते है, जो इस उत्पाद से ज्यादा असरदार हो सकते है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से इस दवा के समान बेहद कम प्रॉडक्टस देखने को मिलते है।

उदरामृत वटी को डॉक्टर की पर्ची के बिना खरीदा जा सकता है, लेकिन इसका पॉजिटिव रिजल्ट पाने के लिए अपने डॉक्टर द्वारा बताई गई बातों का पालन करें।

आधी से ज्यादा बीमारियां पेट के खराब होने से पैदा होती है, जो हमारी जीवनशैली को प्रभावित करती है। यह दवा पेट द्वारा जनित लक्षणों को ठीक करती है और लिवर के कामकाज में सुधार करती है।

नामUdramrit Vati
निर्माता (Manufacturer)Patanjali Ayurved Limited
संरचना (Composition)आंवला + गिलोय + चित्रक + हरीतकी + अजवाइन + सौंफ + पुदीना + बहेड़ा + लौह भस्म + मंडूर भस्म + अतीस + तुलसी
दवा-प्रकार (Type of Drug)आयुर्वेदिक
कीमत (Price)30 रूपये (40 टैबलेट)

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उदरामृत वटी कैसे कार्य करती है?

  • आंवला में रेचक, भूख उत्तेजक, एंटी इंफ्लेमेटरी जैसे गुण शामिल होते है, जिस कारण यह पेट की सफाई, कब्ज, बवासीर, कठिन मल त्याग, दस्त, भूख में कमी, अपच, आंतों की शिथिलता आदि सभी लक्षणों का निवारण कर सकता है। यह लिवर स्वास्थ्य को बेहतर कर पीलिया, हेपेटाइटिस, शराब से होना वाला नुकसान और अन्य कई मामलों में फायदेमंद हो सकता है। इसके अतिरिक्त आंवला पाचन से जुड़ी कई क्रियाओं, गतिविधियों और लक्षणों में सुधार कर सकता है।
  • गिलोय एक बेल के रूप में होती है, जिसमे औषधीय गुणों का भंडार होता है। जब कोई इंसान बीमारी की चपेट में जल्दी आता है तो उसका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो सकता है। ऐसे में गिलोय जूस का सेवन करने पर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सकती है। क्रोनिक बुखार यानी शरीर मे जमा कोई पुराना बुखार जो जाने का नाम नहीं लेता है। ऐसे में गिलोय एक असरदार घटक साबित हो सकता है क्योंकि इसमें पाया जाने वाला एंटीपायरेटिक गुण हर प्रकार के बुखार को ठीक कर सकता है।
  • हरीतकी यकृत के कार्य को ठीक कर पित्त रस उत्पादन में वृद्धि करती है जिससे आंतों का कार्य आसान होता है और भूख बढ़ती है।
  • सौंफ पेट शुद्धिकरण के रूप में कार्य करता है। यह पेट की गैस को कम करने तथा इससे होनी वाली परेशानियों का समाधान कर सकता है।
  • लौह भस्म एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, जो शरीर में सप्त धातुओं की पुष्टि करती है। खून की कमी से होने वाले एनीमिया रोग, पीलिया, सूजन, पेट रोग और लीवर विकार में लौह भस्म फायदा दे सकती है।
  • अतीस त्रिदोष शामक जड़ी-बूटी है। यह पित्त वृद्धि से होने वाले लक्षणों को ठीक कर सकता है। इसमें डायजेस्टिव गुण पाया जाता है।
  • तुलसी पेट के कई शिकायतों जैसे अपच, कब्ज, दस्त, गैस, एसिडिटी आदि में राहत दे सकती है।

उदरामृत वटी के उपयोग व फायदे – Benefits & Uses in Hindi

निम्न अवस्था या विकार में Udramrit Vati को विशेषज्ञ द्वारा रोगी को सलाह किया जाता है। Udramrit Vati का उपयोग विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह बिना लिए ना करें।

  • लिवर की बीमारियां
  • पेट में दर्द और मरोड़
  • पीलिया
  • एनीमिया
  • एसिडिटी
  • कब्ज
  • गैस
  • दस्त
  • पुराने बुखार
  • भूख न लगना
  • वजन बढ़ना
  • कमजोर प्रतिरोधक क्षमता

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उदरामृत वटी के दुष्प्रभाव – Side Effects in Hindi

उदरामृत के बारें में रिसर्च से पता चलता है कि इस दवा को दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल करने पर कभी कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। लेकिन इसकी अति या दुरुपयोग करने से बचें।

उदरामृत वटी की खुराक – Dosage in Hindi

एक सामान्य व्यक्ति इस दवा की दिन में 2 टैबलेट लें सकता है। इसकी एक गोली सुबह नाश्ते के बाद तथा एक गोली रात को भोजन के बाद लेने से बेहद अच्छा परिणाम प्राप्त हो सकता है।

छोटे बच्चों के लिए उदरामृत की खुराक कम की जा सकती है। अथार्त छोटे बच्चों की सही खुराक जानने के लिए बच्चों के डॉक्टर से परामर्श लें।

इस दवा की सही उपचार अवधि और सटीक खुराक विधि को जानने के लिए चिकित्सीय मदद लें, क्योंकि ऐसे में, मरीज की वर्तमान हालात की जांच अहम हो सकती है।

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सावधानियां – Udramrit Vati Precautions in Hindi

निम्न सावधानियों के बारे में Udramrit Vati के उपयोग से पहले जानना जरूरी है।

किसी अवस्था से प्रतिक्रिया

निम्न अवस्था व विकार में Udramrit Vati से दुष्प्रभाव की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए जरूरत पर, विशेषज्ञ को अवस्था बताकर ही Udramrit Vati की खुराक लें।

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