अभ्रक भस्म

अभ्रक भस्म के फायदे, खुराक, नुकसान, सावधानी, साइड इफ़ेक्ट्स | Abhrak Bhasma in Hindi

अभ्रक भस्म क्या है? – What is Abhrak Bhasma in Hindi

अभ्रक भस्म को आयुर्वेद चिकित्सा में काफी नाम मिला है। यह भस्म बहुधा पर्वतों से पाए जाने वाले अभ्रक से निर्मित की जाती है।

आयुर्वेद चिकित्सा दवा निर्माण के लिए अभ्रक को ठोस रूप की जगह चूर्ण रूप में ही इस्तेमाल करता है। अभ्रक भस्म बहुत से आयुर्वेदिक उत्पाद में मौजूद होता है, जैसे योगेन्द्र रस, लक्ष्मीविलास रस, मन्मथ रस आदि

मुख्य चार प्रकार के अभ्रक होते है- पिनाक अभ्रक, नाग अभ्रक, ददूर्र अभ्रक, वज्राभ्रक। आयुर्वेदिक दवाओं में प्रयोग होने वाली भस्म वज्राभ्रक की होती है, क्योंकि यह सबसे श्रेष्ठ और उत्तम मानी जाती है।

अभ्रक तासीर में ठंडी होती है, स्वाद में कसैली होती है, त्रिदोष को नियंत्रित करती है, लोहे की कमी को पूरा करती है, सप्त धातुओं की पुष्टि करती है और दाह को शांत करती है।

यह आयुवर्धक जड़ी-बूटी कई मेक्रो और माइक्रो मिनरल्स की आपूर्ति को बढ़ाती है।

इसके उपयोग से कफ रोग, यौन कमजोरी, प्रमेह, पेट के विकार, नपुंसकता, वीर्यपात, बुखार, शारीरिक कमजोरी, मानसिक थकावट, पाचन दोष, श्वसन संबंधी विकार, उन्माद, यकृत विकार, कुष्ठ रोग, टी.बी, रक्तपित्त, अम्लपित्त, पीलिया, क्षय रोग, बवासीर, एनीमिया, मूत्रकच्छ, कृमि दोष, अस्थमा और अनेक कई प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जा सकता है।

अभ्रक का रासायनिक सूत्र K(Mg,Fe)3AlSi3O10(F,OH)2 होता है। आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार अभ्रक को मुख्य दो भागों में बांटा जा सकता है- Alkaline Mica (क्षारीय अभ्रक) और Ferromagnesium Mica (फेरोमैग्नेशियम अभ्रक)।

अभ्रक भस्म को Calcination Process (कैल्सीनेशन प्रक्रिया) द्वारा निर्मित किया जाता है, जिसे आयुर्वेद में “पूट” कहते है। पुटों की संख्या के आधार पर भस्म की गुणवत्ता मापी जाती है, अर्थात जितनी अधिक पुट संख्या उतनी प्रभावशाली भस्म।

शुद्ध अभ्रक को विभिन्न प्रकार के पौधों के रस और जड़ी-बूटियों के रस के साथ विचूर्णन करते है। इसके बाद इसे केक के रूप में आकार दिया जाता है और फिर इस केक को 800 से 900℃ के उच्च तापमान पर रखा जाता है।

यह पुरी प्रक्रिया एक पुट होती है। इस प्रक्रिया को बार-बार तब तक दोहराया जाता है, जब तक अभ्रक का अति सूक्ष्म चूर्ण प्राप्त न हो। इस शतपुटी भस्म को धूप में रख दिया जाता है, ताकि इसमें से नमी निकल जाएं। इस अभ्रक भस्म को एम्बर रंग की काँच की बोतलों में संग्रहित किया जाता है।

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अभ्रक भस्म के फायदे – Abhrak Bhasma Benefits in Hindi

अभ्रक भस्म में मौजूद कई गुणों के कारण यह हमारे स्वास्थ्य को अनेक फायदें देती है, जो कुछ इस प्रकार है।

  • मेध्या (बुद्धि में बढ़ोतरी)
  • बल्या (मांसपेशियों की ताकत में सुधार)
  • वामन (मतली और उल्टी पर रोक)
  • रसायनी (पूरे शरीर को जीवंत करना)
  • दीपन (पेट की आग बढ़ाना)
  • ज्वर (बुखार में उपयोगी)
  • गुल्मजीत (पेट के ट्यूमर में मददगार)
  • गर्भप्रदा (बांझपन का उपचार)
  • कुष्ठ (त्वचा विकारों का इलाज)
  • संग्रहणी (दस्त से राहत)
  • अनुलोमना (सांस लेने में सुधार)
  • चाकुश्य (आंखों की समस्याओं से छुटकारा)

अभ्रक भस्म का उपयोग – Abhrak Bhasma Uses in Hindi

पाण्डु रोग (पीलिया) के उपचार में मददगार

अभ्रक भस्म के सेवन से कई पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है। यह भस्म शरीर में कैल्शियम और आयरन की कमी को दूर कर पीलिया के इलाज में मददगार हो सकती है।

पुरुषों को यौन कमजोरी से मुक्ति

अभ्रक भस्म की गुणकारी प्रवृत्ति मर्दाना ताकत को बढ़ाने में सहायक साबित होती है। यह भस्म धातु की पुष्टि कर वीर्य के उत्पादन को बढ़ाती है, शीघ्रपतन से छुटकारा दिलाती है, नपुंसकता को दूर करती है और नसों को दुरुस्त करती है।

पुरानी खाँसी और श्वास संबंधी समस्याओं का इलाज

अभ्रक भस्म को पिप्पली के साथ लेने से पुरानी खाँसी और अत्यधिक बलगम की स्थितियों में लाभ मिलता है। यह भस्म फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाकर श्वसन दर को सामान्य कर सकती है।

शारीरिक और मानसिक कमजोरी से छुटकारा

अभ्रक भस्म शरीर से हर तरह की कमजोरी को भगाने का एक सरल उपाय है। यह भस्म बढ़ते हुए उम्र के प्रभाव को कम कर शरीर को शक्तिशाली बनाती है और मानसिक रूप से सशक्त बनाती है।

पाचन से जुड़े विकारों का उपचार

यह भस्म पेट के रोगों और यकृत रोगों को दूर कर पाचक रसों का स्राव सुनिश्चित करती है। यह भस्म भूख में सुधार करने, भोजन का अवशोषण बढ़ाने और संक्रमणों से मुक्ति दिलाने का काम करती है, जिससे पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव दिखते है।

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अभ्रक भस्म के चिकित्सीय लाभ

निम्न विकार के इलाज में अभ्रक भस्म का उपयोग आयुर्वेद में किया जाता है।

  • यकृत रोग
  • अम्लपित्त
  • रक्तपित्त
  • मूत्राघात
  • पीलिया
  • उदर रोग
  • प्लीहा रोग
  • नपुंसकता
  • जरा रोग
  • बाल झड़ना
  • त्वचा रोग
  • किड़नी विकार
  • मधुमेह
  • बुखार
  • कृमि रोग
  • अल्पशुक्राणुता
  • शीघ्रपतन
  • यौन कमजोरी
  • मानसिक रोग
  • हिस्टीरिया
  • निद्रा
  • हृदय के विकार
  • त्वचा रोग

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अभ्रक भस्म के दुष्प्रभाव – Abhrak Bhasma Side Effects in Hindi

अभ्रक भस्म को चिकित्सीय निगरानी के उचित दिशा-निर्देशों के साथ लेने से इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते है। हालांकि इसकी अधिकता से कुछ संभावित हो सकते है, जो निम्नलिखित है।

  • तीव्र रक्तस्राव
  • हृदय की गति बढ़ना
  • अल्सर
  • मेटेलिक स्वाद

अभ्रक भस्म की खुराक – Abhrak Bhasma Dosage in Hindi

  • अभ्रक भस्म की औषधीय खुराक दिन में 1 से 2 रत्ती यानी 125 मिलीग्राम से 250 मिलीग्राम तक लेने की सलाह दी जाती है।
  • छोटे बच्चों में इसकी खुराक के लिए सख्ती बरती जानी आवश्यक है। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
  • हर प्रकार के मधुमेह में इस भस्म को शिलाजीत या गिलोय के सत्व के साथ प्रयोग करने की नसीहत दी जाती है।
  • एनीमिया और पीलिया में इस भस्म को अमृतारिष्ट और मंडूर के साथ लेने से फायदा होता है।
  • मानसिक कमजोरी और थकान में इसे मुक्तापिष्टी के साथ लेना चाहिए।
  • हृदय रोग से पीड़ित लोगों को यह भस्म शहद के साथ लेने से फायदा होता है।
  • वीर्य दोष में अभ्रक भस्म को भंग के चूर्ण के साथ लेना लाभदायक साबित होता है।
  • अन्य और कई विकारों के लिए इस भस्म की खुराक के बारें में जानकारी किसी अच्छे विशेषज्ञ या चिकित्सक से प्राप्त करें।

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Abhrak Bhasma FAQ in Hindi

1) क्या अभ्रक भस्म स्तनपान कराने वाली और गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित है?

उत्तर: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए इस भस्म की खुराक चिकित्सक की देखरेख में ही ली जानी चाहिए। इन विषय में दुष्प्रभावों से बचाव हेतु सख्ती बरतनी आवश्यक है।

2) क्या अभ्रक भस्म की खुराक के बाद भारी कार्य करना सुरक्षित है?

उत्तर: इस भस्म की खुराक के बाद मरीज की वर्तमान स्थिति तय करती है कि उसे भारी कार्य करना चाहिए या आराम करना चाहिए।

3) क्या अभ्रक भस्म के सेवन से इसकी आदत लग सकती है?

उत्तर: नहीं, इस भस्म के सेवन से इसकी आदत नहीं लगती है। यह भस्म प्रकृति में पूरी तरह नशामुक्त है।

4) क्या अभ्रक भस्म को लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है?

उत्तर: इस भस्म से मौजूद लक्षण की उपचार अवधि की जानकारी चिकित्सक से अवश्य लें। जटिल मुद्दों में इसे लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए चिकित्सीय मदद आवश्यक है।

5) क्या अभ्रक भस्म भारत में लीगल है?

उत्तर: हाँ, यह भस्म भारत में पूर्णतया लीगल है। इससे बने उत्पादों को बिना डॉक्टरी पर्चे के भी खरीद सकते है।

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