सफेद मूसली

सफेद मूसली क्या है? – What is Safed Musli in Hindi

सफेद मूसली प्रकृति की एक विशिष्ट देन है, जिसके प्रभाव से समग्र स्वास्थ्य लाभान्वित होता है।

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सफेद मूसली का प्रयोग आयुर्वेदिक, होम्योपैथी और यूनानी जैसी हर्बल चिकित्सा पद्धति में किया जाता है।

सफेद मूसली को हर्बल वियाग्रा कहा जाता है, जो यौन संबंधी समस्याओं में ज्यादातर इस्तेमाल ली जाती है।

मूसली दो प्रकार की होती है: सफेद मूसली व काली मूसली। काली मूसली की तुलना में सफेद मूसली ज्यादा लाभदायक होती है, इसलिए आयुर्वेदिक दवाओं में सफेद मूसली का ही इस्तेमाल किया जाता है।

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सफेद मूसली का एक पौधा जिसमें सफेद फूल लगते है, इसी कारण इसे कुछ जगहों पर व्हाइट गोल्ड औषधि भी कहते है। इसे दुर्लभ जड़ी-बूटियों की श्रेणी में रखा गया है, जो कभी-भी लुप्त हो सकती है।

औषधीय संयोजन में इसकी जड़ें और बीज की ज्यादा उपयोगिता होती है।

इसके असीमित फायदें है, जो मधुमेह, आर्थराइटिस, कैंसर, नपुंसकता, गठिया, यूटीआई, मानसिक तनाव, शारीरिक कमजोरी जैसे अन्य मुद्दों के लिए विस्तारित है।

यह कई अन्य ताकतवर घटकों जैसे अश्वगंधा, शिलाजीत और कपिकच्छु के साथ मिलकर उस उत्पाद को ओर अधिक प्रभावशाली बना सकती है।

सफेद मूसली पुरूष और महिला दोनों के लिए एक चमत्कारी जड़ी-बूटी मानी जाती है, यह कामोद्दीपक और एडाप्टोजेन गुणों को सिद्ध करती है।

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सफेद मूसली के उपयोग व फायदे – Safed Musli Uses & Benefits in Hindi

सफेद मूसली से स्वास्थ्य को होने वाले अचूक फायदें कुछ इस प्रकार है।

वजन बढ़ाने में मददगार

सफेद मूसली में कई विटामिन्स और मिनरल्स पाये जाते है, मतलब यह पोषक तत्वों का एक अच्छा स्रोत है। वर्कआउट करने वालों को थकान की वजह से बीच में बीच के रूकना पड़ सकता है, ऐसे में सफेद मूसली शरीर की ऊर्जा को बढ़ाकर मसल ग्रोथ करने में मदद करती है। इससे वजन बढ़ाने में सफलता हासिल होती है। एक चम्मच सफेद मूसली पाउडर को रोजाना दूध के साथ लेने से वजन बढ़ाने में मदद मिलती है।

मधुमेह को नियंत्रित में रखने हेतु कारगर

सफेद मूसली के फायदों की सूची लंबी है, यह कुछ बड़ी स्थितियों जैसे मधुमेह पर नियंत्रण पाने हेतु भी सहयोगी हो सकती है। इसमें हाइपोग्लाइसेमिक गुण होते है, जो सामान्य से कम ब्लड शुगर लेवल को ऊपर उठाने का काम करती है। यह इंसुलिन उत्पादन को बढ़ाने में मददगार साबित होती है।

प्रतिरक्षा को मजबूत करने में उत्कृष्ट

इस घटक की एक्टिव प्रोपर्टी शरीर से कमजोरी और थकावट को छोड़ने के लिए मजबूर कर देती है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को सशक्त कर एक बेहतरीन ऊर्जावर्धक का उदाहरण है।

बांझपन का उपचार

बांझपन से झुझने वाले पीड़ितों के लिए सफेद मूसली एक अच्छा साथी हो सकता है। यह बांझपन की समस्या का निवारण कर यौवन में चार चांद लगा सकती है। इसके उपयोग से बांझपन के कारणों का सफल इलाज कर गर्भधारण को आसान बनाया जा सकता है।

यौन समस्याओं के लिए बेहद फायदेमंद

सफेद मूसली का सबसे मुख्य कार्य यौन समस्याओं से छुटकारा दिलाना होता है। यह कामोद्दीपक औषधि यौन अंगों को स्वस्थ रखती है। शीघ्रपतन, स्तंभन दोष, स्वप्नदोष, नपुंसकता, कामेच्छा की कमी, वीर्य दोष, शुक्र दोष आदि में सफेद मसूली का योगदान यादगार हो सकता है। यह नसों की कमजोरी दूर कर यौन प्रदर्शन और कामोन्माद को कई गुना बढ़ा सकती है।

मोटापे को कम करने में सहायक

सफेद मूसली आपके शरीर से अतिरिक्त चर्बी यानी फैट को घटाने में मदद कर सकती है। इसके अलावा, वजन घटाकर कई स्वास्थ्य संक्रमणों से बचाव भी कर सकती है।

महिलाओं की कई समस्याओं का समाधान

सफेद मूसली पुरुषों के साथ ही महिलाओं के लिए भी काफी फायदेमंद हो सकती है। यह महिलाओं के स्तनों में दूध के स्तर में वृद्धि कर स्तनपान को सुनिश्चित कर सकती है। श्वेत प्रदर यानी ल्यूकोरिया में सफेद मूसली से अच्छा लाभ प्राप्त हो सकता है।

गठिया में सफेद मूसली का परचम

यह प्राकृतिक जड़ी-बूटी गठिया की समस्या को ठीक कर संयम और शांति का अनुभव देती है। गठिया से पीड़ित वयस्कों को सफेद मूसली के चूर्ण का सेवन करके जरूर देखना चाहिए।

पाचन संबंधी परेशानियों के लिए प्रभावी

पेट में दर्द, दस्त, खून में कमी, पेट में गड़बड़, गैस आदि शिकायतों में सफेद मूसली से लाभ हो सकता है। यह पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए एक प्रभावी उपचार हो सकता है।

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सफेद मूसली की खुराक – Safed Musli Dosage in Hindi

  • एक सामान्य वयस्क 19 से 60 वर्ष तक के लोगों के लिए दिन में 3 से 6 ग्राम सफेद मूसली का सेवन फायदेमंद होता है।
  • 13 से 19 वर्ष के आयु के बच्चों के लिए सफेद मूसली की खुराक दिन में 1.5 से 2 ग्राम तक सुरक्षित है।
  • वृद्धावस्था यानी 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को सफेद मूसली का रोजाना 2 से 3 ग्राम सेवन करना चाहिए।
  • सफेद मूसली की दैनिक अधिकतम खुराक 12 ग्राम तक हो सकती है। इतनी खुराक को विभाजित भागों में लें।
  • इस दवा को अन्य कई जड़ी-बूटियों के साथ तथा विभिन्न तौर-तरीकों से इस्तेमाल करने हेतु चिकित्सक की सलाह लें सकते है।
  • एक खुराक छूट जाये, तो निर्धारित सफेद मूसली का उपयोग जल्द करें। अगली खुराक सफेद मूसली की निकट हो, तो छूटी खुराक ना लें।

सफेद मूसली के दुष्प्रभाव – Safed Musli Side Effects in Hindi

सफेद मूसली सेहत के लिए बिल्कुल सुरक्षित दवा है। इसे एक दायरे में रह कर इस्तेमाल करने से इसके कोई नुकसान नहीं होते है, लेकिन इसकी अति या दुरूपयोग से हमेशा बचने का प्रयास करें। इसकी खुराक में लापरवाही करने से पेट से जुड़ी शिकायतें हो सकती है

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Safed Musli FAQ in Hindi

1) क्या सफेद मूसली का उपयोग गर्भावस्था में किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, सफेद मूसली का गर्भावस्था में सेवन डॉक्टर की सलाह से किया जा सकता है। यह महिलाओं की थकावट को दूर करने और हार्मोन संतुलन को बनायें रखने में मददगार हो सकती है।

2) क्या सफेद मूसली स्तनपान कराने वाली महिलाएं ले सकती है?

उत्तर: हाँ, स्तनपान कराने वाली महिलाएं इस दवा को दुग्ध वृद्धि हेतु इस्तेमाल कर सकती है। इस विषय में इसकी सही खुराक के बारें में अपने चिकित्सक से राय लें।

3) क्या सफेद मूसली को दूध के साथ किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, सफेद मूसली के चूर्ण को दूध के साथ सेवन किया जा सकता है। इसे कई तरीकों से अलग-अलग बीमारियों में प्रयोग में लिया जा सकता है।

4) क्या सफेद मूसली के सेवन से इसकी आदत लग सकती है?

उत्तर: नहीं, यह हर्बल जड़ी-बूटी या इससे बना कोई भी उत्पाद शरीर की आदत नहीं बनता है। यह शत-प्रतिशत स्वास्थ्य सुधारक उपाय है।

5) क्या सफेद मूसली का चूर्ण एल्कोहोल के साथ सुरक्षित है?

उत्तर: इस विषय में इन दोनों की क्रिया-प्रतिक्रिया की जानकारी मौजूद नहीं है। ऐसे में, अपने चिकित्सक के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

6) क्या सफेद मूसली शाकाहारी है?

उत्तर: हाँ, यह पूर्णतया शाकाहारी है। इसका पौधा होता है, जिसकी मूल और बीज का विशेष महत्व होता है।

7) क्या सफेद मूसली भारत में लीगल है?

उत्तर: सफेद मूसली का उत्पादन खासकर भारत में ही होता है। यह जंगलों में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है तथा अब इसकी खेती भी होने लगी है। इससे बने सभी उत्पाद भारत में पूर्णतया संवैधानिक है।

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