नपुंसकता

नपुंसकता का आयुर्वेदिक इलाज | नामर्दी Erectile Dysfunction Ayurvedic Treatment in Hindi


नपुंसकता क्या है? – Erectile Dysfunction in Hindi

नपुंसकता पुरुषों के लिए यौन स्वास्थ्य से जुडी एक समस्या है, जिसमें पुरूष के प्रजनन अंग का पूर्ण निर्माण या उत्थान नहीं हो पाता है। इसे अंग्रेजी में Erectile Dysfunction (ED) या Impotence कहा जाता है।

नपुंसकता में पुरुषांग को स्तंभित रखने में समस्या आती है और पुरूष किसी स्त्री के साथ अच्छा संभोग बनाने में असफल रहता है। यह समस्या बढ़ते जाने से पुरूष अपनी महिला साथी से दूर भागने लगता है, वह शारीरिक संबंध बनाते समय अपने आप को लाचार पाता है, पर किसी से खुल के इस बात का जिक्र नहीं कर पाता है।

नपुंसकता या नामर्दांगी को सामाजिक दृष्टि से हास्य-पात्र माना जाता है, लेकिन चिकित्सा की दृष्टि में यह केवल शरीर की एक कमजोरी है। इसलिए नपुंसकता से ग्रसित मरीज अपनी बीमारी को गुप्त रखने की बजाय किसी अच्छे सलाहकार या चिकित्सक की मदद से इसे ठीक करने का प्रयास करें।

नपुंसकता एक स्थायी लक्षण नहीं है, इसका आयुर्वेद द्वार इलाज भी संभव है। नपुंसकता के बारें में साफ शब्दों में कहें तो यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें उत्तेजना के समय पुरुष के लिंग में पर्याप्त तनाव नहीं आता है या आने के बाद कुछ पलों में ही चला जाता है।

नपुंसकता क्यों होती है?

नपुंसकता के होने के भी कई कारण हो सकते है। लगातार कामेच्छा की कमी के चलते भी धीरे-धीरे नपुंसकता का खतरा बढ़ने लगता है। ज्यादा हस्तमैथून या पोर्न देखने से शिश्न की मांसपेशियों में शिथिलता छाने लगती है, इसे भी नपुंसकता का एक कारण माना जाता है।

हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, उच्च कोलेस्ट्रॉल आदि बड़े लक्षणों से पीड़ित होने पर शिश्न की रक्त वाहिकाएं संकुचित होने लगती है, इससे भी नपुंसकता की संभावना हो सकती है।

हृदय की बीमारियों से पीड़ित लोगों में भी नपुंसकता का होना कोई बड़ी बात नहीं है, हृदय की रक्त धमनियों का कामकाज धीमा होने से हर अंग में रक्त की सप्लाई में कमी आ सकती है। परिणामस्वरूप शिश्न की उत्तेजना का ह्वाश हो सकता है।

हार्मोन्स बदलाव के कारण भी पुरूषों में नपुंसकता यानी इनफर्टिलिटी का प्रभाव देखने को मिल सकता है। मानसिक तनाव और नशीले पदार्थों के अधिक सेवन से नपुंसकता के मामलें सबसे ज्यादा देखने को मिलते है।

बुरी लाइफस्टाइल और आहार युवाओं में नपुसंकता का बड़ा कारण होता है। वही बढ़ती उम्र के साथ ED की समस्या बहुत से लोगों को होती है।

नपुंसकता लक्षण – Symptoms of Erectile Dysfunction

नपुंसकता से पीछा छुड़ाने के लिए पहले हमें जानने की आवश्यकता होती है कि इसके क्या लक्षण होते है और क्या मैं उन लक्षणों से ग्रसित हूँ?

अगर नीचे बताई इन बातों में से कोई बात आप पर लागू होती है, तो बिना घबराएं आप किसी अच्छे चिकित्सक की मदद से अपने यौन स्वास्थ्य को सुधार सकते है।

  • संभोग के शुरुआती चरण में जब आपके शिश्न या लिंग की कठोरता अचानक गायब हो जाती है, तो यह एक नपुंसकता का लक्षण हो सकता है।
  • सहवास क्रिया के समय जब पुरूष प्रदर्शन जल्दी समाप्त हो जाता है, यानी संभोग के समय कामोन्माद कुछ पलों में हो जाता है, तो यह नपुंसकता की बीमारी हो सकती है।
  • नपुंसकता में व्यक्ति की यौन शक्ति इतनी कम हो जाती है कि व्यक्ति अपनी महिला साथी को लिंग की जगह अन्य तरीकों से संतुष्ट करने की कोशिश करता है।
  • जब पुरूष किसी महिला के पास जाने से घबराने लगता है, यह अधिकतर ज्यादा उम्र के लोगो में देखने को मिलता है तो यह भी नपुंसकता का एक आम लक्षण हो सकता है।
  • जो पुरूष काम-क्रियाओं के रुचि नहीं रखते है अर्थात जिन्हें संभोग के प्रति कोई आकर्षण नहीं होता है, यह भी ED का लक्षण हो सकता है। 

नपुंसकता का आयुर्वेदिक इलाज – Erectile Dysfunction Ayurvedic Treatment

नपुंसकता एक कभी न खत्म होने वाली बीमारी है, इस तरह का भ्रम फैलाने वाले लोगों से दूर रहना चाहिए।

आयुर्वेदिक इलाज लेने से नपुंसकता में बेहद अच्छा परिणाम देखने को मिल सकता है। नपुंसकता को समाप्त करने के लिए थोड़ा समय लग सकता है, इस हेतु आपको आयुर्वेदिक इलाज से जुड़े रहने की आवश्यकता होगी।

नपुंसकता के इलाज हेतु विभिन्न दवाइयों, चिकित्सीय उपचार और जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है।

आयुर्वेद नपुंसकता का इलाज कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों तथा पारंपरिक योग द्वारा कर सकता है।

निम्न नपुंसकता का इलाज करने वाली आयुर्वेदिक दवाओं में प्रयुक्त होने वाले मुख्य प्रभावी घटक है।

नपुंसकता के लिए आयुर्वेदिक उत्पाद

निम्न कुछ प्रचलित आयुर्वेदिक उत्पाद है, जिनका इस्तेमाल पुरुषों द्वारा अच्छे यौन स्वास्थ्य को हासिल करने के लिए किया जाता है।

ये सभी OTC वर्ग की दवाई है, इसलिए इन्हें खरीदने और उपयोग करने के लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी नहीं है। पर अगर आपको कोई विकार है, तो डॉक्टर की सलाह लेना उचित माना जाता है।

नपुंसकता के लिए योग क्रिया

निम्नलिखित कुछ प्रभावशाली घरेलू एक्सरसाइज, जिनकी मदद से नपुंसकता को आधिपत्य किया जा सकता है-

पश्चिमोत्तानासन योग विधि

इस व्यायाम या योग में सबसे पहले आप जमीन पर बैठ जाएं, इसके बाद दोनों पैरों को आगे सीधा फैलाएं, फिर सांस लेते हुए अपने हाथों से अपने पैरों की उंगलियों को छूने का प्रयास करें। शुरू-शुरू में कमर पर ज्यादा दबाव न पड़ने दें, थोड़ा समय बीत जाने के बाद अपने नाक को घुटनों पर सटाकर कुछ देर उसी मुद्रा में रहने का प्रयास करें।

पश्चिमोत्तानासन योग

फिर सांस को छोड़ते हुए पुनः सामान्य स्थिति धारण करें। यह एक चक्र पूरा हुआ, आपको दिन में 3 से 4 चक्र करने की आवश्यकता है।

धनुरासन

इसमें आपको पेट के बल लेटने की जरूरत होती है। दोनों हाथों को पैरों की तरफ सीधा रखें फिर पैरों के बीच थोड़ा फासला लेते हुए घुटनों को मोड़ कर कमर के पास आने की तरफ लाएं।

धनुरासन

अब दोनों पैर के एंकल को दोनों हाथों से पकड़े और सांस लेते हुए छाती को जमीन से ऊपर उठाएं। इस अवस्था में अपना शरीर धनुष की तरह दिखने लगेगा, इसका मतलब आपने सही अवस्था प्राप्त की है। इस आसन में जरूरत से ज्यादा शरीर में तनाव पैदा न करें। 15-30 सेकंड के बाद सांसों को छोड़ते हुए पुनः सामान्य स्थिति धारण करें। 

प्रोस्टेटिक मालिश

इसमें पेट और जांघ के बीच के भाग पर मालिश की जाती है। यह मालिश विशेषज्ञ द्वारा की जाती है, जिससे शिश्न में रक्त के प्रवाह का सुधार होने लगता है।

नपुंसकता के घरेलू उपाय

रोजना कसरत करने से आपको यौन स्वास्थ्य में बढ़ा बदलाव दिख सकता है, अगर बुरी लाइफस्टाइल से आपको नपुंसकता की समस्या हुई है।

प्याज के रस में शहद मिलाकर चाटने से बल-वीर्य में बढ़ोतरी होती है।

एक कच्चे अंडे में 25 ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर सर्दियों में सुबह भूखे पेट लें। थोड़ी देर बाद इसके ऊपर गर्म दूध पीने से यौन अंग में गर्माहट पैदा होती है।

संभोग के बाद सोंठ की थोड़ी-सी मात्रा को दूध में पीने से कामशक्ति का प्रबल संचार होता है।

कौंच की जरा-सी जड़ को मुँह में रखकर संभोग करने से वीर्य स्खलन धीमा हो जाता है।

छोटी हरड़ और मिश्री के साथ लौह भस्म का सेवन करने से नपुंसकता से छुटकारा पाया जा सकता है।

तरबूज के बीजों की गिरी और मिश्री 6-6 भाग मिलाकर खाने से शरीर में धातु की पुष्टि होती है। 

नामर्दांगी के इलाज हेतु आप लौंग और शहद के साथ अभ्रक भस्म का सेवन कर सकते है। इससे आपको अच्छा फायदा होने की संभावना है।