अश्वगंधा

अश्वगंधा क्या है? – What is Ashwgandha in Hindi

जो इंसान आयुर्वेदिक दवाओं को अधिक महत्व देता है, वो अश्वगंधा के नाम से जरूर अवगत होता है। अश्वगंधा अधिकतर आयुर्वेदिक दवाओं में पाये जाने वाला मुख्य घटक है, उदाहरण के लिए निम्न कुछ प्रचलित उत्पाद है।

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यह घटक अपना परिचय बहुत सारे फायदों के साथ देता है। आयुर्वेद से जुड़ी ये जड़ी-बूटी स्वास्थ्य के लिए उत्कृष्ट और अद्भुत मानी जाती है। सिर्फ परूषों में ही नहीं, बल्कि महिलाओं के बेहतर स्वास्थ के लिए भी अश्वगंधा उपयोग किया जा सकता है।

यह विशेषकर जटिल कार्यों को आसान बनाता है, शारीरिक और मानसिक शक्ति को बढ़ाता है, पुरानी से पुरानी कमजोरी को दूर करता है तथा मांसपेशियों की वृद्धि और विकास में सहायता करता है। कई रिसर्च कहती है, कि अश्वगंधा एक जबरदस्त Stress Reliever यानि तनाव मुक्त करने वाला हर्ब है।

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अश्वगंधा का वैज्ञानिक नाम Withania somnifera (विथानिया सोम्नीफेरा) है, जिसे विंटर चैरी और इंडियन गिनसेंग नाम से भी याद रखा जा सकता है। इससे खासकर भारत और उत्तरी अफ्रीका में उगाया जाता है।

यह घटक यौन क्रियाओं में आपकी प्रभावी दावेदारी प्रस्तुत कर सकता है।

अश्वगंधा की जड़ और पत्तों से घोड़े के मूत्र जैसी दुर्गंध आती है, इसलिए पुराणों में इसे अश्वगंधा नाम दिया गया है।

पुराने राजा, महाराजाओं द्वारा अश्वगंधा को अच्छे यौन स्वास्थ्य की चाह हेतु चुना जाता था।

अश्वगंधा तासीर में गर्म होता है, जो शरीर की गर्मी को बनायें रखने में मददगार साबित हो सकता है।

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अश्वगंधा के उपयोग व फायदे – Ashwgandha Uses & Benefits in Hindi

अश्वगंधा के बड़े और प्रमुख फायदें (Beneftis) निम्नलिखित है।

त्रिदोष के इलाज में अश्वगंधा फायदेमंद

सेहत को लंबा चलने के लिए वात, पित्त और कफ तीनों में संतुलन होना आवश्यक होता है। अश्वगंधा त्रिदोष को ठीक करने के लिए शरीर में वात, पित्त और कफ के स्तर पर नियंत्रण बनाएं रखने में सहायक होता है। यह पित्त की कमी को दूर कर चयापचय को कमजोर होने से बचाता है, मस्तिष्क को शांत रखता है, अपच का इलाज करता है तथा विषाक्त पदार्थों को शरीर में बसने से रोकता है।
यदि किसी को पित्त अधिकता की समस्या है, तो उन्हें अश्वगंधा के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि इससे पेप्टिक अल्सर, मुँह में छाले और त्वचा तनावग्रस्त हो सकती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को अच्छा करने में मददगार

मानव स्वास्थ्य को संक्रमण या अज्ञात बीमारियों से बचने के लिए एक शक्तिशाली प्रतिरक्षा प्रणाली की आवश्यकता होती है। प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए आंतरिक शुद्धि की आवश्यकता होती है। अश्वगंधा रक्त की शुद्धि कर लाल रक्त कणिकाओं और श्वेत रक्त कणिकाओं की गिनती को बढ़ा सकता है। अश्वगंधा रोग प्रतिरोधक क्षमता को अच्छा करने के लिए हर संभव प्रयास अवश्य करता है।

यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के निवारण में सहायक

अश्वगंधा कामोद्दीपक गुण होते है, जो यौन इच्छा, यौन शक्ति तथा यौन क्षमता को बढ़ाने में कारगर हो सकता है।

यौन दुर्बलता को मिटाने के लिए अक्सर अश्वगंधा को शिलाजीत और सफेद मूसली जैसी शक्ति वर्धक जड़ी बूटियों के साथ दिया जाता है। अश्वगंधा से खासकर पुरुषों को यौन दुर्बलताओं में लाभ मिलता है। प्रजनन क्षमता को बेहतर करने के लिए यह वीर्य से जुड़ी कमियों को दूर करता है। इसकी तासीर गर्म होती है, जिसके कारण यह यौन अंगों में गर्माहट लाने में सफल हो सकता है।

शारीरिक कमजोरी को दूर करने में मददगार

शरीर में ऊर्जा कम हो जाने पर लोगों को शारीरिक कमजोरी महसूस होने लगती है, अश्वगंधा से ऐसे लोगों में ऊर्जा बढ़ाने का काम किया जा सकता है। अश्वगंधा जिम करने वाले लोगों के लिए अच्छा उपाय माना जाता है, ये मांसपेशियों को मजबूत कर वर्कआउट के लिए अतिरिक्त ऊर्जा का उत्पादन कर सकता है। यह चर्बी को जलाने और शारीरिक जोर बढ़ाने हेतु काफी फायदेमंद साबित होता है।

आँखों से जुड़ी समस्याओं से लड़ने में उपयोगी

उम्र बढ़ने के साथ आंखें कमजोर होना या आँखों में लंबे संक्रमण के कारण कोई अन्य दिक्कत होना, आँखों को खराब कर सकता है। यह औषधि एंटीऑक्सीडेंट और साइटोप्रोटेक्टिव गुणों से परिपूर्ण होती है, जो आँखों की रोशनी बढ़ाने, आँखों के संकमण को दूर करने तथा आँखों मे मोतियाबिंद का इलाज करने में उपयोगी साबित हो सकती है।

मधुमेह के लिए अश्वगंधा का अतुल्य प्रभाव

मधुमेह (Diabetes) की जटिलता दर वक्त बढ़ती रहती है, अगर इस पर काबू न किया जाएं तो। इसे काबू में लाने के लिए आपको दवाओं के साथ-साथ कई चीजों से बचने की आवश्यकता पड़ती है। ज्यादातर लोगों एलोपैथिक दवाओं की तुलना में आयुर्वेदिक दवाओं को मधुमेह के लिए चुनते है, इसका भी एक कारण है कि मधुमेह लंबी चलने वाली बीमारी है, जिसके लिए रोजाना दवाओं का पालन जरूरी होता है। ऐसे में एलोपैथी दवाएं किड़नी, लिवर या हृदय के लिए बुरी साबित हो सकती है। लेकिन आयुर्वेदिक सुरक्षित मानी जाती है। आयुर्वेदिक उत्पादों में अश्वगंधा को मधुमेह के लिए चुना जा सकता है। यह बड़े ब्लड शुगर के स्तर को कम कर सामान्य कर सकता है। अश्वगंधा से इंसुलिन प्रतिरोध को कम कर इंसुलिन के उत्पादन को भी बढ़ाया जा सकता है, जो मधुमेह पर नियंत्रण पाने के लिए एक मुख्य कारण है।

बालों के लिए फायदेमंद

यह हर्बल घटक बालों को पोषण प्रदान कर बालों को जड़ो से मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है। दरअसल, यह कोर्टिसोल के स्तर को कम कर बालों को झड़ने से रोकता है। यह मेलेनिन की हानि को कम कर समय से पहले बालों के रंग उड़ने यानी सफेद होने की समस्या से बचाव कर सकता है। अश्वगंधा को नारियल के तेल के साथ इस्तेमाल करने से बाल गिरना बंद हो सकते है। अश्वगंधा अच्छी नींद प्रदान करने में सहायक होता है, जिससे तनावग्रस्त मस्तिष्क को शांति मिलती है और बाल झड़ना बंद हो जाते है। इसको नियमित लेने से बालों में मेलानिन की मात्रा बढ़ती है, जिससे बाल काले, मोटे और मजबूत हो सकते है।

त्वचा की बीमारियों का उपचार करने में अश्वगंधा का सहयोग

अश्वगंधा कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाने, त्वचा में तेलों की वृद्धि करने और त्वचा को पोषित करने का कार्य करता है। इससे त्वचा का रूखापन, श्रृंगीयता, झुर्रियां, काले दाग-धब्बे, खुजली आदि सभी स्थितियों में फायदा मिलता है। अश्वगंधा के बारें में माना जाता है कि यह अकेले स्किन कैंसर से बचाव करने में भी सहायक हो सकता है।

सूजन और दर्द के लक्षणों से राहत दिलाने में लाभकारी

अश्वगंधा में सूजन और दर्द को कम करने का गुण होता है, जो उत्तक संधि से जुड़े दर्द के निवारण में लाभकारी हो सकता है। यह मांसपेशियों की सूजन को मिटाने के लिए भी प्रयोग में लिया जा सकता है।

घाव भरने के लिए प्रभावी

अश्वगंधा बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन को ठीक करने हेतु उपयोग में लिया जा सकता है। यह जीवाणुओं की वृद्धि और विकास को अवरुद्ध घावों को जल्दी ठीक होने की अनुमति देता है। यह घावों पर नई त्वचा को चढ़ाने के लिए कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया को तेज करने का कार्य कर सकता है।

हृदय से जुड़ी परेशानियों के लिए फायदेमंद

अश्वगंधा कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को सुनिश्चित कर हृदय से जुड़ी दुर्भाग्य सम्भावनाओं को कम करता है। यह हृदय के जोखिमों को कम कर हृदय के कामकाज को उचित बढ़ावा देने में प्रभावी उपाय है।

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अश्वगंधा के दुष्प्रभाव – Ashwgandha Side Effects in Hindi

  • अश्वगंधा को ज्यादा मात्रा में लेने से आपको दस्त, मतली, उल्टी, एलर्जी और पेट खराब जैसी समस्याएं हो सकती है। यह सब इसके दुष्प्रभावों में आते है।
  • मधुमेह को नियंत्रित करने वाली दवाएं शुरू होने के बावजूद अश्वगंधा का सेवन करना मधुमेह के स्तर को बिल्कुल घटा सकता है और मस्तिष्क पर गलत असर डाल सकता है।
  • अश्वगंधा का अधिक सेवन करने पर मरीज को बुखार, थकावट और दर्द की शिकायत हो सकती है।
  • नींद की कमी को दूर करने के लिए इसका उचित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए। इसे ज्यादा या कम सेवन करने से आपकी नींद पर बुरा असर पड़ सकता है।

अश्वगंधा की खुराक – Ashwgandha Dosage in Hindi

  • अश्वगंधा की खुराक लेने के लिए इसके रूपों के बारे में जानना भी आवश्यक है, जो मार्केट में मिलते है। जिस उत्पाद में अश्वगंधा मुख्य भूमिका में उन्हें डॉक्टर आपके लिए निर्देशित कर सकते है।
  • यह जड़, पाउडर और टैबलेट के रूप में मिलता है। यदि आप इसकी जड़ लेते है, तो उसे पीसकर पाउडर बना लें। एक कप पानी में एक चम्मच अश्वगंधा मिलाकर उसे 10 मिनट तक उबालें। आप चाहे तो इसकी चाय बनाकर भी सेवन कर सकते है।
  • लोगों को अश्वगंधा पाउडर की बजाय अश्वगंधा टैबलेट लेना ज्यादा आसान लगता है। अश्वगंधा की 1 से 2 टैबलेट दिन में दो बार ले सकते है।
  • अश्वगंधा को घरेलू स्तर पर अन्य बेहद तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे किस घटक के साथ कितना मिलायें और किस बीमारी के लिए इस्तेमाल करें, इन सब बातों को जानने के लिए चिकित्सा सहायता अवश्य ले सकते है।
  • अश्वगंधा के ओवरडोज़ से दुष्प्रभाव ज्यादा हो सकते है। भारी साइड इफेक्ट हो, तो डॉक्टर से मदद लें।

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सावधानियां – Ashwgandha Precautions in Hindi

निम्न सावधानियों के बारे में अश्वगंधा के उपयोग से पहले जानना जरूरी है।

किसी अवस्था से प्रतिक्रिया

निम्न अवस्था व विकार में अश्वगंधा से दुष्प्रभाव की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए जरूरत पर, विशेषज्ञ को अवस्था बताकर ही अश्वगंधा की खुराक लें।

  • ऑटोइम्यून की समस्या (Autoimmune Disease)
  • अनिद्रा (Insomnia)
  • गर्भावस्था (Pregnancy)

भोजन के साथ प्रतिक्रिया

अश्वगंधा की भोजन के साथ प्रतिक्रिया की जानकारी अज्ञात है।

अन्य दवाई के साथ प्रतिक्रिया

निम्न दवाओं व घटको का उपयोग अश्वगंधा के साथ ना करें । क्योंकि ये और अश्वगंधा साथ में प्रतिक्रिया जल्दी करते है। जरूरत होने पर चिकित्सक से मिलकर ही फैसला करें।

  • बीपी (Blood Pressure) की दवाएं
  • थायरॉइड की दवाइयां
  • नींद की दवाइयां
  • मधुमेह की दवाई

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Ashwgandha FAQ in Hindi

1) क्या Ashwgandha गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित है?

उत्तर: अश्वगंधा को बेहद गर्म घटक माना जाता है, जो शरीर के तापमान के साथ क्रीड़ा कर सकता है। आमतौर पर, इसे गर्भवती महिलाओं द्वारा नहीं लेने की सलाह दी जाती है क्योंकि अश्वगंधा में गर्भ को गिराने की क्षमता होती है। इस विषय में अश्वगंधा से जुड़ी उत्पादों को लेने से पहले चिकित्सा मंजूरी अवश्य लें।

2) क्या Ashwgandha के सेवन से इसकी आदत लग सकती है?

उत्तर: इस घटक से मिलने वाले लाभों की सूची बड़ी है, साथ ही नुकसानों की संभावना भी ज्यादा रहती है। इस आयुर्वेदिक घटक से शरीर को आदत नहीं लगती है, इसमें नशे के गुणों का अभाव है। अपनी वर्तमान मेडिकल स्थिति के आधार पर इसे लंबे समय तक इस्तेमाल करना है या नहीं, इसकी जानकारी अच्छे चिकित्सक द्वारा प्राप्त करें।

3) क्या Ashwgandha मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकता है?

उत्तर: इस विषय में अपने निजी मासिक धर्म चक्र से जुड़े चिकित्सक का परामर्श लें।

4) क्या Ashwgandha भारत में लीगल है?

उत्तर: हाँ, यह हर्बल घटक भारत में पूर्णतया लीगल है। भारत में मिलने वाले कई आयुर्वेदिक उत्पादों में इसका इस्तेमाल होता आया है।

संदर्भ

Scientific Basis for the Therapeutic Use of Withania somnifera (Ashwagandha): A Review http://anaturalhealingcenter.com/documents/Thorne/articles/Ashwagandha.pdf Accessed On 14/07/2021

Studies on the immunomodulatory effects of Ashwagandha https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/0378874195013180 Accessed On 14/07/2021

An investigation into the stress-relieving and pharmacological actions of an ashwagandha (Withania somnifera) extract https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6750292/ Accessed On 14/07/2021

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