शतावरी
नाम (Name)शतावरी (Asparagus Racemosus)
दवा-प्रकार (Type of Drug)हर्बल दवाई
उपयोग (Uses)रतौंधी, अनिद्रा, सिर दर्द, सर्दी-जुखाम, पेट दर्द आदि
दुष्प्रभाव (Side Effects)एलर्जी, बदबूदार पेशाब, गैस, कफ, नाक बहना आदि
ख़ुराक (Dosage)जरूरत व अवस्था अनुसार
किसी अवस्था पर प्रभावगर्भावस्था व अतिसंवेदनशीलता
खाद्य पदार्थ से प्रतिक्रियाअज्ञात
अन्य दवाई से प्रतिक्रियाअज्ञात

शतावरी क्या है? – What is Shatavari in Hindi

शतावरी आयुर्वेद की एक अभिन्न औषधि है। यह नाम से जितनी सुंदर प्रतीत होती है, उतनी ही प्रभावी भी साबित होती है। शतावरी दो शब्दों से मिलकर बना है – शत मतलब ‘सौ‘ और वरी मतलब ‘इलाज‘। इस अद्भुत जड़ी-बूटी को खेती के माध्यम से उगाया जाता है। इसे शतावर या सतावर भी कह सकते है।

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यह एक बेल है, जिसमें बेहद सारी जड़े होती हैं और प्रत्येक जड़ 1-2 सेंटीमीटर मोटी तथा 30-100 सेंटीमीटर लंबी होती है।

पहली बार शतावरी की खोज वैज्ञानिकों द्वारा सत्रह के दशक में की गई थी। लेकिन शतावरी एक प्राचीन औषधि है, जिसे स्त्रियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक माना जाता है।

शतावरी में विटामिन (A, C, E, K, B6), कैल्शियम, आयरन, फाइबर, प्रोटीन आदि सभी पोषक तत्वों की विशेष भागीदारी होती है।

शतावरी माइग्रेन, झुर्रियों, वजन घटाने, अनिद्रा, शारीरिक कमजोरी, वीर्य दोष, स्वप्नदोष, आवाज बैठना, सूखी खांसी, अपच, सर्दी-जुखाम, पेट दर्द, आंखों की समस्या, मूत्र रोग, रतौन्धी, सूजन, बवासीर और पथरी जैसी कई अन्य छोटी-बड़ी समस्याओं के इलाज में फायदेमंद है।

शतावरी सीधा लक्षणों के मुख्य बिंदु को टारगेट कर अल्प समय में स्वास्थ्य की गुणवत्ता में पुनः सुधार लाती है।

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शतावरी कैसे काम करती है?

  • शतावरी में एंटीऑक्सीडेंट ग्लूटाथियोन होता है, जो मुँहासों और झुर्रियों से बचाव कर त्वचा की सौंदर्यता का पूरा ख्याल रखती है।
  • शतावरी में मौजूद कैल्शियम और फोलेट, हड्डियों में मजबूती पैदा करने और शारीरिक ढाँचे की रूपरेखा में सुधार करने का कार्य करते है।
  • शतावरी में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर मौजूद होते है, जो अतिरिक्त चर्बी को तोड़कर वजन कम करने का कार्य बखूबी पूरा करते है।
  • शतावरी मर्दाना शक्ति और सहनशक्ति को बढ़ाने में सहायक हो सकती है। यह हताश पुरुषों में नया जोश और उमंग भरने का कार्य करती है, जिससे कामेच्छा के प्रति आकर्षण पैदा होता है।
  • शतावरी मानसिक हमलों को कम कर मस्तिष्क की असामान्य गतिविधियों को शांत करने और एक अच्छी नींद प्रदान करने का कार्य करती है।
  • शतावरी में पाया जाने वाला विटामिन K, महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द से राहत देने का कार्य करता है।
  • शतावरी की सुखदायी विशेषता के कारण, यह अन्य कई शारीरिक लक्षणों का आयुर्वेदिक तौर-तरीकों से इलाज करने में सहायक बनती है।

शतावरी के फायदे – Shatavari Benefits in Hindi

शतावरी को निम्न अवस्था व विकार में सलाह किया जाता है।

  • रतौंधी
  • अनिद्रा
  • सिर दर्द
  • सर्दी-जुखाम
  • स्वप्नदोष
  • नपुसंकता
  • पेट दर्द
  • अपच
  • स्तनों में दूध की कमी
  • शारीरिक कमजोरी
  • वीर्य विकार
  • सूजन
  • आंखों की बीमारियां
  • स्टैमिना की कमी
  • नाक के विकार
  • रक्त संबंधी समस्याएं
  • सीने में जलन
  • बेहोशी
  • वात और पित्त दोष
  • मूत्र संबंधी परेशानियां
  • यौन विकार
  • पथरी
  • बुखार
  • बवासीर

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शतावरी के दुष्प्रभाव – Shatavari Side Effects in Hindi

निम्न साइड एफ़ेक्ट्स शतावरी के कारण हो सकते है। आमतौर पर साइड एफ़ेक्ट्स शतावरी से शरीर की अलग प्रतिक्रिया व गलत खुराक से होते है और सबको एक जैसे साइड एफ़ेक्ट्स नहीं होते है। अत्यंत शतावरी से दुष्प्रभाव में डॉक्टर की सहायता लें।

  • एलर्जी
  • बदबूदार पेशाब
  • गैस
  • कफ
  • नाक बहना
  • उल्टी
  • थकावट

शतावरी की खुराक – Shatavari Dosage in Hindi

  • खुराक डॉक्टर द्वारा शतावरी की रोगी की अवस्था अनुसार दी जाती है।
  • शतावरी को कच्चा या अशुद्धि के साथ इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। एक सामान्य आयु के व्यक्ति हेतु शतावरी की खुराक कई तरीकों से ली जा सकती है।
  • शतावरी जूस को दिन में एक बार 2-3 चम्मच बराबर पानी की मात्रा के साथ खाली पेट इस्तेमाल करें।
  • शतावरी चूर्ण को दिन में दो बार एक चौथाई या आधा चम्मच दूध या शहद के साथ इस्तेमाल करें। शतावरी चूर्ण की खुराक लंच और डिनर के बाद ही लें।
  • शतावरी कैप्सूल की खुराक दिन में दो बार 1 या 2 कैप्सूल निर्धारित है। शतावरी कैप्सूल का इस्तेमाल भोजन के बाद दूध या पानी के साथ करें।
  • शतावरी टैबलेट की खुराक दिन में दो बार 1 या 2 टैबलेट निर्धारित है। इसे भी भोजन के बाद दूध या पानी के साथ ही लिया जाना चाहिए।
  • शतावरी सिरप की खुराक दिन में दो बार एक या दो चम्मच लें। शतावरी सिरप को हल्के भोजन के साथ इस्तेमाल करें।
  • बच्चों में शतावरी की खुराक बाल रोग विशेषज्ञ के परामर्श अनुसार ही दें।
  • शतावरी की खुराक में सुविधानुसार बदलाव करने से हमेशा बचें। इस दवा की खुराक से पहले वर्तमान सभी गुप्त स्थितियों के बारें में अपने सलाहकार से चर्चा अवश्य करें।
  • एक खुराक छूट जाये, तो निर्धारित शतावरी का सेवन जल्द करें। अगली खुराक शतावरी की निकट हो, तो छूटी खुराक ना लें।

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शतावरी की उपयोग विधि – Shatavari Uses Method in Hindi

  • अनिद्रा की समस्या में, 2-4 ग्राम शतावरी चूर्ण को दूध में पकाकर इसमें घी मिलाकर सेवन करें।
  • स्तनों में दूध की कमी होने पर, 1-2 ग्राम शतावरी की जड़ से बने पेस्ट का उपयोग दूध के साथ करें।
  • कमजोर स्टैमिना में, दूध के साथ शतावरी चूर्ण की खीर बनाकर इसका सेवन करें।
  • सांस की समस्या में, शतावरी पेस्ट, घी और दूध को मिलाकर पकाएं। 5-10 ग्राम मात्रा में इसका सेवन करें।
  • पेट दर्द में 10ml शतावरी रस में 10-12 ग्राम शहद जोड़कर हर सुबह इसका सेवन करें।

सावधानियां – Shatavari Precautions in Hindi

निम्न सावधानियों के बारे में शतावरी के सेवन से पहले जानना जरूरी है।

किसी अवस्था से प्रतिक्रिया

निम्न अवस्था व विकार में शतावरी से दुष्प्रभाव की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए जरूरत पर, डॉक्टर को अवस्था बताकर ही शतावरी की खुराक लें।

  • गर्भावस्था
  • अतिसंवेदनशीलता

भोजन के साथ प्रतिक्रिया

शतावरी की भोजन के साथ प्रतिक्रिया की जानकारी अज्ञात है।

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Shatavari FAQ in Hindi

1) क्या शतावरी हार्मोन असंतुलन को ठीक करने में सहायक है?

उत्तर: Premenstrual Syndrome (PMS) जैसे लक्षण हार्मोन परिवर्तन के कारण पैदा होते है, जिससे महिलाओं के व्यवहार, शारीरिक स्वास्थ्य और भावनाओं पर असर पड़ सकता है। शतावरी PMS के प्रबंधन और इलाज में सहायता कर हार्मोन असंतुलन को ठीक करने में मददगार हो सकती है।

2) क्या शतावरी गर्भवती महिलाओं में सुरक्षित है?

उत्तर: गर्भावस्था के समय शतावरी की थोड़ी खुराक सुरक्षित हो सकती है और कई डॉक्टर इसकी मंजूरी भी देती है। लेकिन डॉक्टर की सलाह को अनदेखा कर गर्भावस्था में शतावरी का ज्यादा सेवन करना हानिकारक हो सकता है। शतावरी से जुड़ी सभी अच्छी और बुरी बातों की जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श जरूर करें।

3) क्या शतावरी स्तनपान कराने वाली महिलाओं में सुरक्षित है?

उत्तर: हाँ, यह आयुर्वेदिक दवा स्तनपान कराने वाली महिलाओं में सुरक्षित हो सकती है। यह दवा दूध के स्तर में भी सुधार कर सकती है, लेकिन अनावश्यक ज्यादा शतावरी की खुराक लेना भी सही नहीं है।

4) क्या शतावरी मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकती है?

उत्तर: शतावरी को मासिक धर्म चक्र की समस्याओं के निवारण हेतु इस्तेमाल करने की सलाह डॉक्टर द्वारा दी जा सकती है, क्योंकि अमूमन यह दवा मासिक धर्म चक्र पर बुरा प्रभाव नहीं छोड़ती है। इस विषय में पूरी जानकारी के लिए आप अपने मासिक धर्म चक्र से जुड़े चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

5) क्या शतावरी टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में सुधार कर सकती है?

उत्तर: हाँ, यह दवा पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में सुधार करने में सहायक है। यह यौन दुर्बलताओं से छुटकारा दिलाकर मर्दाना शक्ति को स्थापित करने में मददगार है। साथ ही, शतावरी वीर्य से जुड़े दोषों में भी बेहद फायदेमंद साबित होती है।

6) क्या शतावरी एल्कोहोल के साथ सुरक्षित है?

उत्तर: इस विषय में जानकारी अज्ञात होने के कारण ठोस प्रमाण के साथ कुछ भी कहा नहीं जा सकता है। इस विषय में डॉक्टर से बातचीत जरूरी है।

7) क्या शतावरी पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकती है?

उत्तर: पाचन को सुधारने में शतावरी का अहम योगदान हो सकता है। लेकिन यह दवा स्वस्थ पाचन को बिना प्रभावित किये भी अन्य कार्यो को सम्पूर्ण करने में सहायक है।

8) क्या शतावरी बालों के विकास में सहायक है?

उत्तर: बालों के विकास हेतु प्रोटीन की आवश्यकता होती है और शतावरी में प्रोटीन मौजूद होता है। बालों के पोषण और विकास के लिए शतावरी का उपयोग लंबे समय के लिए करना पड़ सकता है। इस विषय में आयुर्वेद से जुड़े चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।

9) क्या शतावरी के सेवन से आदत लग सकती है?

उत्तर: नहीं, शतावरी के सेवन से इसकी आदत नहीं लगती है। यह एक स्वास्थ्य सुधारक टॉनिक है, जो पूर्णतया प्राकृतिक है।

10) क्या शतावरी सफेद पानी की समस्या के उपचार में सहायक है?

उत्तर: हाँ, यह महिलाओं में ल्यूकोरिया (सफेद पानी की समस्या) के उपचार में सहायक हो सकती है। शतावरी महिलाओं के लिए बेहद अच्छा विकल्प है।

11) क्या शतावरी की खुराक के बाद ड्राइविंग करना सुरक्षित है?

उत्तर: हाँ, शतावरी से जुड़े उत्पादों की खुराक के बाद ड्राइविंग करना सुरक्षित है, क्योंकि यह झपकी या चक्कर का कारण नहीं बनती है।

12) क्या शतावरी भारत में लीगल है?

उत्तर: हाँ, शतावरी भारत में पूर्णतया लीगल है और भारत में इसकी खेती अनेक स्थानों पर की जाती है।

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