Allopathic Medicine in Hindi

हमारे आस-पास बहुत सारी उपचार विधि मौजूद है, जैसे होम्योपैथी, यूनानी, आयुर्वेद, Acupressure आदि। लेकिन आज के समय में सबसे प्रचलित चिकित्सा शैली एलोपैथी (Allopathy) है।

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भारत में एलोपैथी चिकित्सा के आगमन से कई छोटी और बड़ी बीमारियों की पहचान करना, उनकी रोकथाम करना तथा उनका पूरा इलाज करना आसान हो चुका है।

अधिकतर लोग सिर दर्द से लेकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए एलोपैथिक दवाओं (Allopathic Medicine) पर निर्भर करते है। इस लेख में आपको Allopathic Medicine पर हिन्दी में विस्तार से जानकारी मिलेंगी।

एलोपैथिक दवाएं क्या है? – What is Allopathic Medicine in Hindi

जब हम कभी भी बीमार होते है, तब हमारा पहला प्रयास होता है कि कैसे हम इस बीमारी से जल्दी छुटकारा पाएं।

एलोपैथिक दवाएं एलोपैथी चिकित्सा के अंतर्गत आती है। ये दवाएं अति प्रभावी और शीघ्र परिणामदायक होती है। इन दवाओं को देने से पहले मरीज की बीमारी के लक्षणों का पता लगाया जाता है।

एलोपैथी दवाओं को अंग्रेजी दवा भी कहा जाता है, जिसका प्रचलन आज पूरे विश्वभर में है। ये दवाएं छोटी-मोटी परेशानियों से तुरंत छुटकारा दिलाने और स्वास्थ्य को जल्दी रोगमुक्त बनाने में मददगार होती है।

NSSO सर्वे अनुसार 90 प्रतिशत लोग भारत में एलोपैथि चिकित्सा को अन्य चिकित्सा प्रणाली से ज्यादा प्राथमिकता देते है।

Paracetamol, Aspirin, Aceclofenac और Ibuprofen प्रचलित एलोपैथी दवा और उनके घटक के रूप में उपयोग किए जाते है।

एलोपैथिक दवाओं को कुछ अन्य नाम से भी जाना जाता है।

  • Conventional Medicine
  • Western Medicine
  • Mainstream Medicine
  • Biomedicine
  • Orthodox Medicine

एलोपैथिक दवाओं का इतिहास – Allopathic Medicine History

इस चिकित्सा प्रणाली को नवीनतम माना जाता है क्योंकि ये कुछ दशकों से ही अस्तित्व में आई है। यह पद्धति अंग्रेजो की हुकूमत के समय भारत में पहली बार प्रचनल में आई।

इस चिकित्सा पद्धति का नामकरण होम्योपैथी के जन्मदाता सैमुएल हैनीमेन द्वारा सन 1810 में किया गया था। इनका मानना था कि ये चिकित्सा पद्धति रोग के लक्षण की अपेक्षा अन्य चीजों का इलाज करती है।

इस चिकित्सा में आने वाली दवाएं अनेक रंग, बनावट, स्वरुप और स्वाद में आती है, जिनको लेने के लिए चिकित्सा सलाह की आवश्यकता होती है।

लेकिन कुछ दवाएं, जिन्हें OTC (Over-The-Counter) दृग में रखा गया है, उन्हें डॉक्टरी पर्ची के बिना खरीद और उपयोग भी कर सकते है।

एलोपैथिक दवाओं का सिद्धांत – Principle

एलोपैथी चिकित्सा विज्ञान के Authentic Principle (प्रामाणिक सिद्धांत) पर आधारित है। इस सिद्धांत के अनुसार इसमें बड़ी से बड़ी बीमारी की पहचान कर उनका दवाओं द्वारा शीघ्र इलाज शुरू किया जाता है।

एलोपैथी कार्बनिक यौगिक को जटिल मानव कार्बनिक प्रणाली में प्रवेश करवाती है और शरीर की किसी लक्षित गतिविधि को प्रभावित कर बीमारी को कम या खत्म करने का प्रयास करती है।

एलोपैथी चिकित्सा अनुसंधान-आधारित (Research-Based) है, जिसमें कई स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल किए जाते है और परिणाम के आधार पर निर्णय लिए जाते है।

ये दवाएं स्वास्थ्य को जल्दी ठीक कर अपना प्रभावी प्रमाण साबित करती है। ट्रॉमा, दुर्घटना, गंभीर स्थितियों और हड्डी टूटने के मामलों के एलोपैथी चिकित्सा और इनसे जुड़ी एलोपैथिक दवाओं का बेहतर कोई जबाव नहीं है।

एलोपैथिक पद्धति में दवाओं की शाखाएं

इस चिकित्सा प्रणाली के अंतर्गत आने वाली विभिन्न शाखाएं निम्नलिखित है।

Biochemistry (बायोकेमिस्ट्री)

इसके अंतर्गत रासायनिक घटकों का अध्ययन करने और उनका शरीर पर प्रभाव के बारें में जानकारी देने का कार्य आता है।

Anatomy (एनाटॉमी)

यह चिकित्सा शारीरिक संरचना का अध्ययन करना मुख्य कार्य होते है।

Cytology (कोशिका विज्ञान)

चिकित्सा का यह क्षेत्र कोशिकीय अध्यनन पर कार्य करता है।

Endocrinology (एंडोक्रिनोलॉजी)

इसके अंतर्गत हार्मोन और शरीर पर उनके प्रभाव की जांच का कार्य होता है। यह Endocrine System को समझने की शाखा है।

Biophysics (बायोफिज़िक्स)

यह शाखा जैविक प्रणालियों को सूचीबद्ध कर उनके कामकाज को समझने के लिए मॉडल, भौतिकी, जीव विज्ञान, गणित, रसायन विज्ञान आदि का उपयोग करती है।

Genetics (जेनेटिक्स)

एलोपैथिक चिकित्सा की यह शाखा शरीर की मूल इकाई जीन (Gene) पर आधारित होती है।

Neuroscience (तंत्रिका विज्ञान)

तंत्रिका विज्ञान मस्तिष्क की सुक्ष्मता से जांच कर तंत्रिका रोगों का अवकलन करती है। संज्ञानात्मक तंत्रिका विज्ञान, सेलुलर तंत्रिका विज्ञान और आणविक तंत्रिका विज्ञान इसके ही प्रकार माने जाते है।

Toxicology (टॉक्सिकोलॉजी)

टॉक्सिकोलॉजी शाखा Toxicants जिसे हम जहर कह सकते है, इसका अध्ययन कर प्रत्येक विषाक्त स्थिति का पता लगाने और उसका सफल इलाज करने में सक्षम है।

Microbiology (सूक्ष्म जीव विज्ञान)

यह भाग उन जीवों का अध्ययन है, जिन्हें नग्न आंखों से देखना असंभव होता है। इस शाखा में बैक्टीरियोलॉजी, वायरोलॉजी, माइकोलॉजी (कवक का अध्ययन) और परजीवी विज्ञान आदि सब शामिल हैं।

Nutrition (पोषण)

इसमें पोषण विशेषज्ञों द्वारा पोषक तत्वों के अध्ययन का कार्य किया जाता है। पोषक तत्वों की कमी से विचलित स्थिति को कैसे ठीक किया जाएं या कैसे उनकी कमी को दूर किया जाएं और अन्य समस्याओं के समाधान का जिम्मा होता है।

एलोपैथिक दवाओं के फायदें – Benefits of Allopathic Medicine

एलोपैथिक चिकित्सा और दवा के बहुत सारे फायदे है, उनमें से कुछ बड़े फायदे निम्नलिखित है।

  • इनसे लाभ मिलने की संभावना शीघ्र होती है।
  • एलोपैथिक चिकित्सा के विशेषज्ञ यानि डॉक्टर और एलोपैथिक दवाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
  • एलोपैथिक दवाएं इमरजेंसी में बेहद कारगर साबित होती है।
  • इसमें ऑपरेशन और सर्जरी के जरिये गंभीर बीमारियों को भी ठीक किया जा सकता है।
  • इस विधि में तकनीक और साधनों का अपडेट समय पर होता रहा है।
  • छोटी से लेकर बड़ी हर बीमारी को ठीक करने में प्रभावी होती है।
  • टीकाकरण (Vaccination) जो की एलोपैथी का हिस्सा है, इससे बड़ी बीमारी की चपेट में आने से पहले ही बच सकते है। जैसे पोलियो, हेपेटाइटिस बी, इन्फ्लूएंजा, कोलेरा आदि।

एलोपैथिक दवाओं के नुकसान – Disadvantages of Allopathic Medicine

  • एलोपैथिक चिकित्सा से लाभ सीमित है, लेकिन इससे होने वाली हानियों की कोई सीमा नहीं है। यह दवाएं शीघ्र उपचार के साथ ही दुष्प्रभावों की चेन को बना सकती है।
  • इस चिकित्सा द्वारा बीमारी को दवाओं के द्वारा सिर्फ दबाया जाता है, जिससे दर्द से जल्द राहत मिलती है। लेकिन यह बीमारी का जड़ से इलाज नहीं करती है, जो की इस पद्धति की एक कमी है।
  • एलोपैथिक दवा से इलाज लेने पर इस बारें में पूर्ण आश्वस्त होना मुश्किल है कि ये आपकी बीमारी को पुनः आने नहीं देगी। इन दवाओं को लेने के बावजूद आप वापस जल्द बीमार हो सकते है। यह तर्क अक्सर आयुर्वेद चिकित्सा से तुलना के लिए दिया जाता है।
  • एलोपैथी दवाओं का कोर्स और इलाज प्रतिक्रिया महंगा हो सकता है, कई बार गरीबों के बस के बाहर भी हो सकता है।
  • एलोपैथी दवाओं के साथ आपको कई भोज्य पदार्थों के सेवन से परहेज करने की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • एलोपैथी दवा का दुरुपयोग जानलेवा हो सकता है, इनके उपयोग में सावधानी रखना बेहद जरूरी है।

Allopathy Vs Homeopathy in Hindi

एक तरफ जहां एलोपैथी में तुरंत इलाज दिया जाता है, वहीं होम्योपैथी में इलाज के लिए समय लगता है।

एलोपैथी दवाइयां बीमारी को दबाने का काम करती है, वहीं होम्योपैथी दवाइयां बीमारी का जड़ से इलाज करती है।

होम्योपैथी की तुलना में एलोपैथी में ज्यादा रिसर्च और मेडिकेशन की आवश्यकता होती है।

एलोपैथी में शारीरिक हालातों को देखकर दवाओं को चुना जाता है, वहीं होम्योपैथी में शारीरिक और मानसिक दोनों स्थितियों को अच्छे से समझने के बाद उचित दवाओं का चयन किया जाता है।

एलोपैथी दवाओं से दुष्प्रभावों की ज्यादा संभावना रहती है, लेकिन होम्योपैथी दवाएं ज्यादा सुरक्षित होती है, इनसे दुष्प्रभावों की संभावना बेहद कम होती है।

Allopathy Vs Ayurveda in Hindi

आयुर्वेद का जनक भारत को माना जाता है और यह बेहद प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, लेकिन एलोपैथी चिकित्सा पद्धति पश्चिम के लोगों की आधुनिक खोज है।

आयुर्वेदिक दवाएं पूर्णतया प्राकृतिक होती है और किसी भी बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकने में सहायक होती है, इसके विपरीत एलोपैथी दवाएं रसायनिक घटकों के कृत्रिम संयोजन से बनी होती है, जो केवल लक्षणों को दूर करती है।

आयुर्वेदिक दवाओं का क्रम लंबा चल सकता है, जबकि एलोपैथी दवाएं शीघ्र इलाज में यकीन रखती है।

आयुर्वेद के कई शुद्ध घटक काफी मूल्यवान होते है, जिसके कारण आयुर्वेदिक दवाओं की कीमत एलोपैथिक दवाओं से ज्यादा हो सकती है।

आयुर्वेद शल्य चिकित्सा यानी चीरा-फाड़ी में विश्वास नहीं रखता है, लेकिन एलोपैथी इमरजेंसी में शल्य चिकित्सा से इलाज के सकता है।

Himalaya Confido Tablet, Patanjali Swasari Vati, Baidyanath Triphala Juice और Dabur Chyawanprash प्रचलित आयुर्वेदिक उत्पाद है।

Allopathy Vs Unani Medicine in Hindi

यूनानी चिकित्सा अरब देश, अफ्रीकन और आसपास के इलाकों से इजात हुई पद्धति है, जो प्रकृति को अपना आधार मानती है और इससे जुड़ी सभी दवाएं प्राकृतिक तत्वों से मिलकर बनी होती है, वहीं दूसरी ओर एलोपैथी पद्धति अंग्रेजों द्वारा विकसित हुई और इसमें आने वाली दवाइयां क्लिनिकल टेस्टेड होती है।

भारत में यूनानी दवाएं, एलोपैथी और आयुर्वेद के बाद एक बड़े स्तर पर उपयोग की जाती है।

 जवारिश कमूनी, माजून फ्लास्फा, शरबत बजूरी मोतादिल और माजून अरद ख़ुरमा यूनानी दवा के कुछ उदाहरण है।

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