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लड़का पैदा करने के अचूक उपाय | घरेलू नुस्खे व चिकत्सा प्रणाली

आज के समय में हम अपने हर सवाल का जवाब इंटरनेट पर ढूँढने की कोशिश करते है। लड़का पैदा कैसे करें? इस तरह के हजारों-लाखों सर्च लोग हर महीने करते है, जैसे

  • लड़का पाने की दवा
  • पुत्र प्राप्ति के घरेलू नुस्खे
  • लड़का होने का इंजेक्शन
  • बेटा प्राप्त करने की विधि और मंत्र
  • लड़का कैसे होता है

लड़का या लड़की पाने की कोई भी ठोस दवाई और विधि नहीं है, लेकिन इसकी संभावना वैज्ञानिक और घरेलू नुस्खो के माध्यम से बढाई जा सकती है, जिसके बारे में हम इस लेख में बताएँगे।

यह लेख पढ़ने से पहले यह बात जान लेनी आवश्यक हैं, कि लड़का या लड़की दोनों का महत्व आज की दुनिया में एक समान हैं। हर बच्चा अनोखा हैं और कुदरत की अच्छी देन हैं।

अजन्मे शिशु के लिंग निर्धारण माता-पिता के नियंत्रण में नहीं होता हैं। यदि कोई व्यक्ति खुद को संतान असंतुष्टि के कारण अत्यधिक निराशा, आक्रोश, या बंधन से जूझते हुए पाता हैं, तो स्वास्थ्य चिकित्सक के साथ अपनी भावनाओं का साझा करना आवश्यक बन जाता हैं।

लिंग का विज्ञान

अगर प्राकृतिक तौर-तरीकों पर सब छोड़ा जायें, तो लड़का या लड़की होने की संभावना 50-50 होती हैं। मानव शरीर का वैज्ञानिक अध्यनन प्रकृति कारणों के बाद की घटना हैं। ‘लिंग’ (लड़का या लड़की) जानने से पहले 23 जोड़े गुणसूत्रों यानि Chromosome का ज्ञान होना आवश्यक हैं।

इन्सानों के पास 23 Chromosomes के जोड़े होते है, जिसमें से 22 को Autosomes कहा जाता है। बचे 1 Chromosome के जोड़े को Sex Chromosome कहते है, जो लिंग निर्धारित करते है। Sex Chromosome पुरुषों में XY होता है और महिलाओं में XX होता है।

नर द्वारा Y (शुक्राणुओं) और मादा द्वारा X (अंडे) गुणसूत्र का संयोजन होने पर बनने वाला भ्रूण लड़के का होता हैं। यदि दोनों गुणसूत्र XX हैं, तो अजन्मे शिशु का लिंग लड़की होता हैं।

source: web-books.com

विज्ञान की दर्शती से शिशु का लिंग माँ पर निर्भर नहीं होता है, क्योंकि महिलाओं के पास सिर्फ XX Chromosome होते है। पुत्र प्राप्ति के लिए XY Chromosome की जरूरत होती है, और वो पिता के द्वारा मिलता है।

अल्ट्रासोनोग्राफी द्वारा शिशु की छवि प्राप्त कर मतभेद किया जाने लगा है, जिससे भारी भ्रूण हत्या का उदय हुआ और पुरुषों की तुलना में महिलाओं का लिंगानुपात काफी घट गया। इस स्थिति में सुधार हेतु आज इस विधि को पूरी तरह असंवैधानिक कर दिया गया हैं।

2008 में पेड़ों पर अध्ययन से पता लगाया गया हैं, कि शुक्राणु में उपस्थित Chromosome शिशु के लिंग के साथ-साथ अपने पूर्वजों के संकेत का पता लगाने में भी सहायक हैं। जैसे, कद-काठी, बोलीचाल, हरकते आदि।

एक अध्ययन के अनुसार, पुरुषों को अपने माता-पिता से अधिक लड़के या लड़कियां पैदा करने की प्रवृत्ति विरासत में मिल सकती हैं। जिसका अर्थ यह हो सकता हैं, कि कुछ पुरुषों में शुक्राणु अधिक Y या X Chromosome पैदा करते हैं। इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति के भाई अधिक हैं, तो उसके बेटे होने की संभावना ज्यादा है।

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चिकित्सा प्रणाली

लड़के की चाह रखने वाले जोड़ों में दोनों की स्वास्थ्य हालात में कोई यौन संबंधी बीमारी नहीं होनी चाहिए। पुरूषों में शुक्राणुओं की गतिशीलता में बाधा होने के कारण परिवार बढ़ाने की चाह अधूरी लगने लगती हैं, लेकिन बेहतर चिकित्सा पद्धति के साथ ही एक स्वस्थ बेबी के जन्म को निर्धारित किया जा सकता हैं।

एक तय लिंग के शिशु होने की 100% गारंटी के लिए कोई प्राकृतिक विकल्प नहीं हैं, लेकिन कृत्रिम साधनों के माध्यम से ऐसा किया जा सकता हैं, यदि देश में प्रजनन क्लीनिक में लिंग चयन की अनुमति हो।

कृत्रिम निषेचन

सहायक प्रजनन तकनीक (ART) लोगों को चिकित्सा प्रक्रियाओं के माध्यम से भ्रूण का गर्भ निर्धारण करने की अनुमति देता हैं। इसमें कुछ और विधियां भी शामिल हैं, जैसे IVF और ZIFT आदि।

Preimplantation Genetic Diagnosis (PGD) या Preimplantation Genetic Selection (PGS) नामक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रियाओं के माध्यम से भ्रूण का परीक्षण, वांछित लिंग के साथ भ्रूण प्रत्यारोपित करना संभव हैं। भ्रूण बनाने के लिए इसमें IVF का प्रयोग किया जाता हैं।

भारत में ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया गैरकानूनी है।

Shettles Method

चिकित्सा क्षेत्र में शेट्टल्स विधि (Shettles Method) द्वारा लड़का होने की संभावना को बढ़ाने की योजना बनाई जा सकती हैं। इसे Landrum B. Shettles द्वारा 1960 में विकसित किया गया था। इस विधि में अंड के साथ शुक्राणु का व्यवहार और अंड निषेचन की पूरी प्रक्रिया का उल्लेख हैं।

शेटल्स विधि के मुख्य निम्न बिंदु जिनका पालन करने से लड़का पैदा होने की संभावना काफी बढ़ जाती हैं,

  • महिला के ओव्यूलेशन के करीब संभोग को बढ़ावा
  • लिंग को गहरा अंदर डालने की सभोग पोजीशन अपनाना
  • महिला प्रजनन में जरूरी क्षारीय वातावरण बनायें रखना
  • महिला में पहले कामोत्तेजना होना

घरेलू नुस्खे

एक लड़के की चाह रखने वाले जोड़ों को ऑनलाइन वीडियो या डाटा में दिखाये नुस्खों को बिना सोचें-समझे बिल्कुल भी न अपनाएं। इसके लिए फैमिली प्लानिंग करते समय अपने निजी चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।

एक लड़का पैदा करने के लिए आस-पास के बाहरी आवरण या बाहरी परिस्थितियों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती हैं, जो शुक्राणुओं को Y अंड निषेचन के लिए अनुकूल बनाते हैं।

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आहार

2008 में 740 गर्भवती महिलाओं की एक वैज्ञानिक जांच की गई, जिस दौरान यह पता लगाया गया हैं, कि अधिक कैलोरी युक्त भोजन करने से लड़के के गर्भधारण की संभावना काफी अधिक होती हैं। अनावश्यक वजन बढ़ाने पर जोर देने की बजाये स्वस्थ भोजन (संपूर्ण खाद्य पदार्थ, ताजे फल और हरी सब्जियां, कम चीनी, तेल से बने भोज्य पदार्थ आदि) लेने की एक दैनिक दिनचर्या तैयार करें।

एक मानव अध्ययन में दावा किया गया हैं, कि पोटेशियम और सोडियम की उच्च मात्रा के आहार महिला या पुरुष द्वारा लिए जाने से पुत्र प्राप्ति की संभावना बढ़ती है।

संभोग स्थिति

संभोग के दौरान उन स्थिति का उपयोग करना चाहिए, जिसके दौरान महिलाओं में वीर्य ज्यादा अंदर तक जा सकें। इससे शुक्राणुओं को कम दूरी तय करनी पड़ेगी और Y Chromosome के शुक्राणु X शुक्राणुओं को बाहर कर अंडे के साथ निषेचन की प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। इससे लड़के के गर्भधारण की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

एक लड़के को गर्भ धारण कराने के लिए सर्वश्रेष्ठ संभोग स्थिति,

  • डॉगी स्टाइल
  • स्टैंडिंग-अप
  • स्ट्रैडलिंग

अन्य बिन्दु

लड़के का गर्भ धारण करने के लिए ढीले अंडरगारमेंट सबसे अच्छे हैं। यदि एक आदमी बहुत टाइट अंडरगारमेंट पहनता है, तो इससे शुक्राणु उत्पादन प्रभावित हो सकता हैं। महिलाओं को भी ढीले कपड़े पहनने चाहिए।

स्त्रियों या पुरुषों दोनों में जरूरत से ज्यादा हस्तमैथून या यौन क्रिया संबंधी ऐलोपेथिक दवाओं से बाद में गर्भ धारण करने में थोड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता हैं। यदि एक पुत्र प्राप्ति की उम्मीद करते है, तो पुरुष और महिला दोनों को यौन हानि को कम करने की आवश्यकता होती हैं।

निष्कर्ष

हम 21वी सदी में है और यह समानता का युग है। लेकिन फिर भी समाज में प्रचलित हवन, जादू-टोना, बाबा आदि सभी अंधविश्वास लड़का होने का प्रबल दावा करते हैं, लेकिन इनके पीछे उनका निजी लाभ और सिर्फ कभी तुक्का होता हैं।

शिशु लड़का या लड़की का होगा, यह पूरी तरह से माता-पिता के हाथ में नहीं होता है। लेकिन लड़के होने की संभावना को थोड़ा बढ़ाया जा सकता हैं, इसके लिए संभोग समय, स्थिति, स्वास्थ्य अवस्था, आहार और अन्य तरीकों पर पूरा नियंत्रण करने की आवश्यकता होती हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में लिंग चयन की विचारधारा से जुड़ी अनुमति, PGD या PGS जैसी चिकित्सा पद्धति के द्वारा हैं। जबकि यूनाइटेड किंगडम (UK), चीन और अन्य देशों में यह पद्धति अवैध हैं। इसका मूल कारण यह माना जाता हैं, कि इसके द्वारा माता-पिता लड़कियों की तुलना में लड़कों की ज्यादा अनुपात राशि का चयन करेंगे और पारिवारिक असंतुलन की समस्याएं पैदा हो जाएगी और ऐसा होता भी है।

फिर भी इस प्रणाली के साथ चलने वाले देशों में यह सुनिश्चित किया गया हैं, कि वे भविष्य में होनी वाली संतान के लिंग के बारे में फैसला कर सकें। लेकिन इसके लिए उस परिवार में दूसरे लिंग का एक बच्चा होना चाहिए।

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